Wednesday, 14 November 2018

जीराफूल धान अब छत्तीसगढ़िया, प्रदेश की पहली ऐसी किस्म जिसे मिला जीआई टैग

जीराफूल धान अब छत्तीसगढ़िया, प्रदेश की पहली ऐसी किस्म जिसे मिला जीआई टैग

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धान की मशहूर छत्तीसगढ़ी किस्म जीराफूल को ज्योग्राफिकल इंडेक्स (जीआई टैग) मिल गया है। अब इस धान की इस किस्म को दुनिया में जीराफूल नाम से ही जाना जाएगा। यह प्रदेश का पहला ऐसा कृषि उत्पाद है जिसे टैग मिला है।
​​​​​​​कुछ माह पूर्व कड़कनाथ मुर्गे के लिए छत्तीसगढ़ ने कोशिश की, लेकिन मप्र को इसका टैग मिल गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार सरगुजा के बतौली ब्लाॅक में बांसाझाल स्थित महिलाओं का समूह जीराफूल की खेती कर रहा है। उन्हें विवि द्वारा तकनीकी सहायता दी गई। देश में इससे पहले धान की अलग-अलग किस्मों के लिए केरल, पं. बंगाल, यूपी आदि राज्यों को जीआई टैग दिया गया है। अब इस श्रेणी में छत्तीसगढ़ भी शामिल हो गया है।

टैगिंग से यह फायदा
  • उत्पाद को कानूनी संरक्षण मिलता है। हेरा-फेरी रोकने में सहायता मिलती है।
  • उत्पाद व क्षेत्र की लोकप्रियता को अलग पहचान मिलती है।
  • दुनिया में प्रोडक्ट की ब्रांडिंग होती है और इससे उचित दाम भी मिलता है।
  • विज्ञापन की जरूरत खत्म। उत्पाद क्वालिटी के लिए जाना जाता है।

यह है जीआई टैग
जीआई टैग किसी उत्पाद का एक चिन्हित नाम या साइन होता है। इसे विशेष भौगोलिक उत्पत्ति, विशेष गुणवत्ता और पहचान के लिए भारत सरकार देती है। टैग 10 साल के लिए संरक्षित रहता है। इसके बाद फिर रिन्यू कराया जा सकता है।

खासियत
नमी वाले खेतों में आसानी से इस जीराफूल का उत्पादन किया जा सकता है। यह शुद्घ देशी सुगंधित किस्म है।

कुछ और उत्पादों के लिए भी प्रयास करेंगे

जीराफूल को जीआई टैग मिलना बड़ी उपलब्धि है। विवि ने कुछ और उत्पादों की पहचान की है, जिसके विशिष्ट गुण हैं। इनके लिए भी प्रयास किया जाएगा।  -डॉ. एसके पाटील, कुलपति कृषि विवि 

अब तक राज्य में जीआई टैग उत्पाद 
  • बस्तर ढोकरा    :    हस्तशिल्प  
  • ढोकरा(लोगो)  :       हस्तशिल्प 
  • बस्तर वुडक्राफ्ट  :     हस्तशिल्प  

Tuesday, 13 November 2018

राज्य में अब तक 24 पद्मश्री व तीन पद्म विभूषण

राज्य में अब तक 24 पद्मश्री व तीन पद्म विभूषण


Chhattisgarh Padma Bhushan & Padma Shri
युवा प्रदेश में 2018 तक प्रतिभाओं को 24 पद्मश्री और तीन पद्मभूषण से नवाजा जा चुका है। सम्मान प्राप्त उन प्रबुद्घजनों को नमन है, जिन्होंने प्रदेश को शीर्ष तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धि से प्रदेश अलंकृत हो गया।
अविभाजित मध्यप्रदेश में मिले थे पांच पद्मश्री
सन्‌ 1976 में पंडित मुकुटधर पाण्डेय को शिक्षा एवं साहित्य में पद्मश्री का सफरनामा शुरू हुआ। फिर हबीब तनीर साहब की कला का पद्मश्री अवार्ड मूरिद हुआ। पद्मश्री की बराय आगे बढ़ी और प्रदेश की लोककलाकार तीजन बाई तक पद्मश्री आ पहुंचा। सफरनामा खत्म नहीं हुआ समाजिक कार्य के लिए राजमोहिनी देवी को पद्मश्री से नवाजा गया। समाज कार्य में प्रदेश को देश में अपना दम खम जारी रखा और धरमपाल सैनी को पद्मश्री दिया गया। यहां तक था अविभाजित मध्यप्रदेश में मिले पद्मश्री अवार्ड की दास्तां।
नए प्रदेश बनने के बाद मिले 19 पद्मश्री
सन्‌ 2004 में नए प्रदेश बनने के बाद चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. अरुण त्रयम्बक दाबके को दिया गया। फिर सन्‌ 2006 को छोड़ लगातार प्रदेश के बुद्घजनों को पद्मश्री से नवाजा जाने लगा। 2018 तक प्रदेश में अभिवाजित मध्यप्रदेश के समय के पांच और नए प्रदेश छत्तीसगढ़ के 19 पद्मश्री मिल चुके हैं।
पद्मश्री की सूची
  • सन्‌ 1976 पंडित मुकुटधर पाण्डेय - शिक्षा एवं साहित्य
  • सन्‌ 1983 हबीब तनवीर कला जगत
  • सन्‌ 1987 तीजन बाई कला जगत
  • सन्‌ 1989 राजमोहिनी देवी समाजिक कार्य
  • सन्‌ 1992 धरमपाल सैनी समाजिक कार्य
  • सन्‌ 2004 डॉ. अरुण त्रयम्बक दाबके चिकित्सा क्षेत्र
  • सन्‌ 2005 डॉ. पुनाराम निषाद कला जगत
  • मेहरुन्निशा परवेज शिक्षा एवं साहित्य
  • सन्‌ 2007 डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय शिक्षा एवं साहित्य
  • सन्‌ 2008 जॉन मार्टिन नेल्सन कला जगत
  • सन्‌ 2009 गोविंद राम निर्मलकर कला जगत
  • सन्‌ 2010 डॉ. सुरेन्द्र दुबे शिक्षा एवं साहित्य
  • सन्‌ 2011 डॉ. पुखराज बाफना चिकित्सा
  • सन्‌ 2012 शमशाद बेगम सामाजिक कार्य
  • फुलबासन बाई यादव सामाजिक कार्य
  • सन्‌ 2013 स्वामी जी सी डी भारती (भारती बंधु) कला जगत
  • सन्‌ 2014 अनुज शर्मा (रामानुज) कला जगत
  • सन्‌ 2015 सबा अंजुम खेल जगत
  • शेखर सेन कला जगत
  • सन्‌ 2016 ममता चंद्राकर कला जगत
  • सन्‌ 2017 अरुण शर्मा पुरात्व
  • सन्‌ 2018 पं. श्यामलाल चतुर्वेदी साहित्य एवं शिक्षा
  • दामोदर गणेश बापट समाज कार्य
पद्मभूषण से नवाजे गए प्रदेश के बुद्घजन
  • हबीब तनवीर
कला जगत
सन्‌ 2002
हबीब तनवीर नाट्य मंचन के ऐसे कलाकार और निर्देशक थे, जो हर नाटक को गांव-गावं से लेकर देश के बड़े से बड़े मंच तक पहुंचाए। उनकी निर्देशन में बहुत से रंगकर्मी आज अभिनय में परचम लहरा रहे हैं।
  • तीजन बाई
कला जगत
सन्‌ 2003
पंडवानी गायक तीजन बाई की आवाज देश-विदेश में गूंजती रहती है। उनकी आवाज और कला को 2003 में पद्मभूषण से नवाजा गया।
  • सत्यदेव दुबे
सन्‌ 2011
कला एवं रंगमंच
सत्यदेव के रंगमंच से प्रदेशवासी रू-ब-रू हैं। उनके निर्देशन में कई कहानियों को रंगकर्मीयों ने मंच पर संजोया।

गोंडी और हलबी में 'प्रेम' का रस घोलेगी बापू की हिंद स्वराज

गोंडी और हलबी में 'प्रेम' का रस घोलेगी बापू की हिंद स्वराज

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1909 में लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते हुए जहाज पर हिंदुस्तानियों के हिंसावादी पंथ को और उसी विचारधारावाले दक्षिण अफ्रीका के एक वर्ग को दिए गए जवाब के रूप में महात्मा गांधी ने 'हिन्द स्वराज' पुस्तक लिखी। पहले दक्षिण अफ्रीका में छपने वाले साप्ताहिक 'इंडियन ओपिनियन' में यह प्रकट हुई थी। द्वेष धर्म की जगह प्रेम धर्म की सीख देने वाली इस कृति का पहली बार छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली गोंडी और हलबी बोली में अनुवाद किया जा रहा है।

राज्य शासन के निर्देश पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के संचालक सुधीर कुमार अग्रवाल ने बताया कि महात्मा गांधी की पुस्तक 'हिन्द स्वराज' और 'बापू की कुटिया' के अनुवाद का काम शुरू कर दिया गया है। यह पुस्तक न सिर्फ स्कूल में बल्कि कॉलेज, बस्तर व गोंडी, हलबी भाषी छत्तीसगढ़ियों तक बापू का संदेश पहुंचाएगी।

गौरतलब है कि गोंड आदिवासियों की कुल आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार एक करोड़ 32 लाख के आसपास है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में रहने वाले गोंड या तो छत्तीसगढ़ी बोलते हैं या सरगुजिया। वहीं बस्तर इलाके में रहने वाले गोंड आदिवासी या तो तेलुगु मिश्रित गोंडी बोलते हैं या हलबी।

Sunday, 11 November 2018

पहले चरण की 18 सीटों पर मतदान जारी

पहले चरण की 18 सीटों पर मतदान जारी

chhattisgarh election

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 सीटों के लिए वोटिंग जारी है। इनमें बस्तर की 12 और राजनांदगांव जिले की 6 सीटें शामिल हैं। 31.79 लाख मतदाता अगली सरकार चुनेंगे। कुल 190 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें 42 उम्मीदवार करोड़पति हैं। कांग्रेस के 7 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। भाजपा का क्रिमिनल रिकॉर्ड वाला कोई उम्मीदवार नहीं है। पिछले चुनाव में भाजपा को 6 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। 
इस बार पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने बसपा के साथ गठबंधन किया है। इससे पहले चरण में चार से पांच सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा और परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे।
महिला और पुरुष वोटर बराबर 
उम्मीदवार 190 
मतदाता31 लाख 79 हजार 520
पुरुष16 लाख 21 हजार 839
महिला15 लाख 57 हजार 592
थर्ड जेंडर89
राजनांदगांव सीट पर सबसे ज्यादा 30 उम्मीदवार हैं। सबसे कम पांच-पांच उम्मीदवार बस्तर और कोंडागांव सीट पर हैं।

Tuesday, 30 October 2018

‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सरदार सरोवर में बनी दुनिया की सबसे ऊंची 182 मीटर की प्रतिमा

‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ सरदार सरोवर में बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा


सरदार वल्लभभाई पटेल की आज जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात पहुंच चुके हैं। थोड़ी देर में वह नर्मदा जिले में स्थित सरदार सरोवर में बनी दुनिया की सबसे ऊंची 182 मीटर की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण करेंगे।

  • नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध पर बनी यह मूर्ति सात किलोमीटर दूर से नजर आती है। यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इससे पहले चीन की स्प्रिंग बुद्ध सबसे ऊंची प्रतिमा थी। इसकी ऊंचाई 153 मीटर है। इसके बाद जापान में बनी भगवान बुद्ध की प्रतिमा का नंबर आता है जो 120 मीटर ऊंची है। तीसरे नंबर पर न्यूयॉर्क की 93 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी है।
  • 2021 में भारत सरदार पटेल से भी ऊंची प्रतिमा बना लेगा। 212 मीटर ऊंची छत्रपति शिवाजी की यह प्रतिमा मुंबई के पास अरब सागर में बन रही है।
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में पांच साल का वक्त लगा। सबसे कम समय में बनने वाली यह दुनिया की पहली प्रतिमा है। लागत 2990 करोड़ रुपए है।
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को सिंधु घाटी सभ्यता की समकालीन कला से बनाया गया है। इसमें चार धातुओं के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है। इससे इसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगी। स्टैच्यू में 85% तांबा इस्तेमाल हुआ है।
  • स्टैच्यू में लगी लिफ्ट से पर्यटक प्रतिमा के हृदय तक जा सकेंगे। यहां से लोग सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का नजारा देख सकेंगे।
  • प्रतिमा में सरदार के चेहरे की बनावट तय करने के लिए दस लोगों की कमेटी बनाई गई थी। सभी की सहमति के बाद 30 फीट का चेहरा बना गया। इसे 3डी तकनीक से तैयार किया गया है।
  • पटेल की प्रतिमा के होंठ, आंखें और जैकेट के बटन 6 फीट के इंसान के कद से बड़े हैं। इसमें 70 फीट लंबे हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट से ज्यादा है। इसे बनाने में 3400 मजदूरों और 250 इंजीनियरों ने लगभग 42 महीने काम किया।

Saturday, 20 October 2018

पंडवानी गायिका तीजनबाई को मिला जापान का प्रतिष्ठित कला एवं संस्कृति सम्मान

पंडवानी गायिका तीजनबाई को मिला जापान का प्रतिष्ठित कला एवं संस्कृति सम्मान

Pandwani singer Padmabhushan Dr Tejanbai honors International Fukuoka Art Award in Japan


देश की प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्मभूषण डॉ. तीजनबाई को जापान में अंतरराष्ट्रीय फुकुओका कला सम्मान से नवाजा गया है। जापान में मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान के लिए मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी है। डॉ.तीजनबाई को विदेशी धरती पर यह पहला बड़ा सम्मान मिला है। इस दौरान उन्होंने पंडवानी के एक अंश की प्रस्तुति भी दी।

यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय कला क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया है। डॉ.तीजनबाई को सम्मान स्वरूप भारतीय मुद्रा के रूप में 18 लाख नकद व स्वर्ण मेडल, स्मृति चिन्ह भी दिया गया है। आयोजन के दौरान जापान के राजकुमार व रानी भी मौजूद रहीं।

इस दौरान डॉ.तीजनबाई ने पंडवानी की प्रस्तुति भी दी। उन्होंने दु:शासन वध का प्रसंग सुनाया। डॉ.तीजनबाई ने बताया कि विदेश की धरती पर उनका यह पहला बड़ा सम्मान था, इस वजह से वह भावुक हो गई थीं। डॉ.तीजनबाई ने पांच दिवसीय जापान प्रवास के दौरान वहां के दो स्कूलों में बच्चों के सामने भी पंडवानी कला का प्रदर्शन किया।

वहां पर डॉ.तीजनबाई के साथ उनके निज सचिव मनहरण सार्वा सहित पूरी टीम मौजूद थी। तीजन छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोक गीत-नाट्य की पहली महिला कलाकार हैं। देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली तीजनबाई को बिलासपुर विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और पद्म भूषण से अलंकृत किया जा चुका है।

Tuesday, 9 October 2018

भिलाई स्टील प्लांट में धमाका, चार लोगों की मौत

भिलाई स्टील प्लांट में धमाका, चार लोगों की मौत

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छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट में मंगलवार को काम के दौरान धमाका हो गया, जिसमें चार कर्मचारियों की मौत हो गई, वहीं 8 लोग बुरी तरह झुलस गए हैं। घायलों के सेक्टर नौ अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक कोको ओवन में गैस सप्लाई करने वाली पाइप में दो विस्फोट हुए हैं। हालांकि अभी विस्फोट होने के कारणों के बारे में खुलासा नहीं हुआ है। हादसे की जानकारी मिलते ही प्लांट के आला अधिकारी व पुलिस अधिकारी घटना स्थल पर पहुंच गए हैं। गौरतलब है कि भिलाई स्टील प्लांट में कई वर्षों से मेंटेनेंस कार्य में विलंब होने को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।